देशभर में 20% एथेनॉल मिले हुए (E20) पेट्रोल की बिक्री शुरू हो चुकी है। ऐसे में आम जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि "अगर पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाया जा रहा है, तो फिर यह आम पेट्रोल से सस्ता क्यों नहीं है?" केंद्र सरकार ने अब इस पर स्थिति साफ करते हुए सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों का खंडन किया है।
सस्ता क्यों नहीं है E20 पेट्रोल? (किसानों का हित सर्वोपरि)
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, E20 पेट्रोल आम पेट्रोल से सस्ता इसलिए नहीं है क्योंकि सरकार देश के किसानों को आर्थिक मजबूती देने के लिए उनसे 71.86 रुपये प्रति लीटर के ऊंचे और तय दाम पर एथेनॉल खरीदती है। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल है। इस हिसाब से देखें तो पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल की ब्लेंडिंग फिलहाल महंगी पड़ रही है। सरकार का कहना है कि भविष्य में अगर कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जाती है, तभी E20 पेट्रोल तुलनात्मक रूप से सस्ता हो सकेगा।
E20 का असली मकसद: सिर्फ दाम घटाना नहीं
सरकार ने स्पष्ट किया है कि E20 पेट्रोल लाने का मुख्य उद्देश्य पेट्रोल पंप पर कीमतें कम करना नहीं है। इसके वास्तविक लक्ष्य हैं:
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले अचानक उतार-चढ़ाव से आम उपभोक्ताओं को बचाना।
भारत की बहुमूल्य विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) की भारी बचत करना।
पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाना।
अफवाहों पर लगाम: सरकार के 10 स्पष्ट जवाब
सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल से गाड़ियों के इंजन खराब होने जैसी भ्रामक खबरें फैलाई जा रही थीं। सरकार ने इन सभी को सिरे से खारिज करते हुए 10 महत्वपूर्ण तथ्य साझा किए हैं:
पानी की बर्बादी: एथेनॉल बनाने में पानी की भारी बर्बादी का दावा पूरी तरह झूठा है।
खाद्य सुरक्षा: इससे देश की खाद्य सुरक्षा पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ रहा है।
सफल तकनीक: E20 कोई नया 'प्रयोग' नहीं है, बल्कि दुनिया भर में जांची-परखी एक सफल तकनीक है।
इंजन की सुरक्षा: इससे गाड़ियों का इंजन खराब होने की बात पूरी तरह से निराधार है।
माइलेज: वाहनों के माइलेज पर इसका कोई बड़ा या नकारात्मक असर नहीं पड़ता है।
वारंटी और बीमा: E20 के इस्तेमाल से गाड़ी की वारंटी या इंश्योरेंस पर कोई खतरा नहीं है।
चींटियों/मधुमक्खियों का भ्रम: एथेनॉल से चींटियां या मधुमक्खियां आकर्षित होती हैं—यह दावा पूरी तरह मनगढ़ंत है।
सुप्रीम कोर्ट का हवाला: सुप्रीम कोर्ट के नाम पर 'प्रयोग' शब्द का गलत संदर्भ देकर अफवाह फैलाई जा रही है।
फर्जी वीडियो: सोशल मीडिया पर पेट्रोल में सीधे गन्ने का रस मिलाते हुए दिखाए जाने वाले वीडियो 100% फेक हैं।
देश को फायदा: यह पहल न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा कदम है।