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मिशिगन में अब्दुल अल-सैयद की जीत: बन सकते हैं अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर, AP ने किया जीत का दावा

मिशिगन की अमेरिकी सीनेट सीट पर डेमोक्रेटिक पार्टी के अब्दुल अल-सैयद ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स पर बढ़त बना ली है। समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) ने उनकी जीत का दावा किया है। वे अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर होंगे। करीब 85% वोटों की गिनती तक अल-सैयद को 52.0% और रोजर्स को 46.2% वोट मिले थे।

जीत के मायने

यह 2026 के मिडटर्म के सबसे महंगे और ध्रुवीकृत मुकाबलों में से एक था।

मिशिगन की सीट डेमोक्रेट्स के पास ही रहेगी, जिससे सीनेट में पार्टी की बढ़त मजबूत हुई। सीनेट पर नियंत्रण की पार्टी की योजना के लिए यह जीत अहम मानी जा रही है।

इससे देशभर में प्रगतिशील नेताओं को बड़ी मजबूती मिल सकती है।

कौन हैं अब्दुल अल-सैयद?

1984 में डेट्रॉइट के उपनगर रोचेस्टर हिल्स में जन्मे। तीन साल की उम्र में माता-पिता का तलाक हो गया और पिता व सौतेली मां जैकलिन जॉनसन ने उन्हें पाला।

पेशे से डॉक्टर, उन्होंने मिशिगन और कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और महामारी विज्ञान में विशेषज्ञता हासिल की।

2015 में डेट्रॉइट स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी निदेशक बने। 2018 में गवर्नर प्राइमरी में दूसरे स्थान पर रहे और ग्रेटचेन व्हिटमर से 20% से ज्यादा वोटों से हारे।

उन्होंने इससे पहले कोई राजनीतिक पद नहीं संभाला था।

प्रचार और समर्थन

पार्टी नामांकन में उन्होंने हेली स्टीवंस को मामूली अंतर से हराया था। प्रचार के अंतिम दिनों में स्टीवंस ने रिपब्लिकन रोजर्स का समर्थन कर दिया।

व्हिटमर ने प्राइमरी में स्टीवंस का समर्थन किया था, लेकिन नामांकन के बाद अल-सैयद का साथ दिया।

उन्हें बर्नी सैंडर्स और एलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज़ जैसे प्रगतिशील नेताओं के साथ पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा सहित कई उदारवादी डेमोक्रेट्स का समर्थन मिला।

उन्होंने वामपंथी मंच पर प्रचार किया, जिसमें इजरायल को अमेरिकी सैन्य सहायता की आलोचना और अरबपतियों पर टैक्स लगाकर सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के लिए धन जुटाने जैसे मुद्दे प्रमुख थे।

विवाद और आरोप

अल-सैयद ने 7 अक्टूबर 2023 के हमलों के बाद गाजा में इजरायल के अभियान को "जनसंहार" कहा और वेस्ट बैंक में रंगभेद का आरोप लगाया। इजरायल इन आरोपों को दृढ़ता से खारिज करता है।

रिपब्लिकन पार्टी ने उन पर मुस्लिम ब्रदरहुड से संबंध का आरोप लगाया। अल-सैयद किसी भी संबंध से इनकार करते हैं। उनके विरोधियों ने 2012 के एक खुले पत्र पर उनके हस्ताक्षर का हवाला दिया।

वामपंथी टिप्पणीकार हसन पीकर से संबंधों के लिए भी उनकी आलोचना हुई।

पिछले साल अगस्त में उन्होंने डेट्रॉइट के एक यहूदी प्रार्थना स्थल पर एक अरब अमेरिकी के हिंसक हमले पर अपनी टिप्पणियों के लिए मिशिगन के यहूदी समुदाय से माफी मांगी थी। 'यहूदी इनसाइडर' के अनुमान के मुताबिक उनकी उम्मीदवारी ने मिशिगन में यहूदी वोटों को बांटा।

अल-सैयद का जवाब

उन्होंने कहा था कि उनकी निष्ठा अमेरिकी संविधान के प्रति है और मतदाता उनका मूल्यांकन पृष्ठभूमि की बजाय नीतियों से करें। उनके शब्दों में, "मेरा नाम और मेरा धर्म इस बात का कारण नहीं है कि लोग पेट्रोल या किराना नहीं खरीद सकते, डॉक्टर को नहीं दिखा सकते। भले ही मैं आम अमेरिकी से थोड़ा अलग तरीके से प्रार्थना करता हूं, लेकिन हम एक ही चीज के लिए प्रार्थना करते हैं।"