"अल्लाहुम्मा अहियनी मिस्कीनों व अमितनी मिस्कीनों वहशुरनी फ़ी...
Ummah Post
8 February, 2025

"अल्लाहुम्मा अहियनी मिस्कीनों व अमितनी मिस्कीनों वहशुरनी फ़ी ज़ुमरतिल-मसाकीनी यौमल-क़ियामाह।"

तरजुमा (अनुवाद): ऐ अल्लाह! मुझे मिस्कीन (विनीत/ग़रीब) ज़िंदा रखिए और मिस्कनत ही में मौत दीजिए और आख़िरत (क़यामत के दिन) में भी मिस्कीनों (मसाकीन) की जमात के साथ मेरा हश्र (पुनरुत्थान) हो।

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इमाम अबू नस्र सिंधी (रह.) का हिकमत भरा जवाब
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इमाम अबू नस्र सिंधी (रह.) का हिकमत भरा जवाब

इमाम अबू नस्र फ़तह बिन अब्दुल्लाह सिंधी (रहमतुल्लाही अलैहि) दूसरी सदी हिजरी के उन उलेमा (विद्वानों) में से हैं जो सिंधी मूल के थे, और सिंध में मुसलमानों के प्रवेश के बाद इस्लाम से सम्मानित हुए थे। मुसलमान होने के बाद वे तफ़सीर, हदीस, फ़िक़्ह और कलाम के प्रामाणिक विद्वान माने गए। अल्लामा समआनी (रह.)...