"मुअज़्ज़ज़ (आदरणीय) शख़्स का अदना (कमतर) अख़्लाक़ राज़ को छ...
Ummah Post
4 January, 2025

"मुअज़्ज़ज़ (आदरणीय) शख़्स का अदना (कमतर) अख़्लाक़ राज़ को छुपाना है और आला तरीन (सर्वोच्च) अख़्लाक़ यह है कि वह उस राज़ को फ़रामोश (भूल) कर दे!"

— मुहल्लब बिन अबी सुफ़रा रहमतुल्लाह अलैह

【 अल-कामिल फ़िल-लुग़ा वल-अदब (2/232) 】

Share this article
50 रुपये का नोट – इंसानियत और हमदर्दी का एक खूबसूरत सबक
लेख

50 रुपये का नोट – इंसानियत और हमदर्दी का एक खूबसूरत सबक

एक बिजली के खंभे पर एक कागज चिपका देखकर मैं करीब चला गया और उस पर लिखी तहरीर (लिखावट) पढ़ने लगा। लिखा था.........! "बराय-ए-करम (कृपया) ज़रूर पढ़ें। इस रास्ते पर कल मेरा 50 रुपये का नोट खो गया है, मुझे ठीक से दिखाई नहीं देता। जिसे भी मिले, बराय-ए-करम पहुँचा दे, नवाज़िश (कृपा) होगी.................