"ग़ुरबत (ग़रीबी) ने सिखा दी मेरे बचपन को तहज़ीब;
सहमे हुए र...
Ummah Post
12 December, 2024

"ग़ुरबत (ग़रीबी) ने सिखा दी मेरे बचपन को तहज़ीब;

सहमे हुए रहते हैं शरारत नहीं करते!"

🥺❤️‍🩹❤️‍🩹🥺

Share this article
ऐसी नमाज़ अब कौन पढ़ेगा?
लेख

ऐसी नमाज़ अब कौन पढ़ेगा?

बयान किया जाता है कि एसाम बिन यूसुफ, हज़रत हातिम असम्म रहमतुल्लाह अलैह की मजलिस में आए और उन पर आपत्ति (ऐतराज़) करना चाहा। अतः एसाम ने हातिम से कहा: "ऐ अबू अब्दुल रहमान!" (यह हातिम की कुन्नियत है) "आप नमाज़ किस तरह अदा करते हैं?" हातिम रहमतुल्लाह अलैह ने उनकी ओर मुतवज्जोह होकर फ़रमाया: "जब नमाज़ का...