अज्ञानता में डूबे लोगों के लिए गुमराही (भटकाव) के आयोजनों से बढ़कर कोई चीज़ आकर्षक नहीं होती।
ये वे अवसर होते हैं जहाँ अज्ञानता और नासमझी को जश्न के रूप में पेश किया जाता है, और लोग अपनी अज्ञानता के दायरे में खुश होते हैं, बिना यह समझे कि वे वास्तविकता से कितने दूर हैं। ऐसे आयोजनों में बाहरी रौनक और शोर-शराबा होता है, लेकिन उनकी बुनियाद वैचारिक खोखलेपन और अंतर्दृष्टि (बसीरत) की कमी पर होती है।
सच्ची खुशी और शांति केवल ज्ञान, चेतना (شعور) और सच्चाई को अपनाने में है, न कि ऐसे आयोजनों में जो इंसान को और अधिक गुमराही में धकेल दें।