मौलाना इदरीस कांधलवी रहमतुल्लाह अलैह का वाकया (घटना) है। बेच...
Ummah Post
27 October, 2020

मौलाना इदरीस कांधलवी रहमतुल्लाह अलैह का वाकया (घटना) है। बेचारे बड़े भोले-भाले और सीधे-सादे थे। हर वक्त उनका ध्यान अल्लाह सुब्हानहू व तआला की तरफ लगा रहता था, और वे कसरत (अधिकता) के साथ अध्ययन (مطالعہ) करते थे। एक बार वे यहां तशरीफ लाए, मेरे यहां उनका कयाम (ठहराव) था। मैंने अपने साहबजादे से कहा, "हज़रत हज के लिए तशरीफ ले जा रहे हैं, इसलिए कुछ ज़रूरतें हैं, ज़रा तुम साथ बाज़ार चले जाओ।" जब शाम को वापस तशरीफ लाए तो फरमाने लगे, "भाई! मैंने देखा कि जगह-जगह सड़कों पर बोर्ड लगे हुए हैं और उस पर लिखा है 'तब्बत सुनो', 'तब्बत सुनो' (तब्बत से मौलाना का मतलब क़ुरान करीम की सूरह से था), लेकिन यह कहीं नहीं लिखा है कि 'कुल हुवल्लाह सुनो', क्या बात है?" मैंने कहा, "हज़रत! आपसे पढ़ने में गलती हुई है, यह 'तब्बत सुनो' नहीं है बल्कि 'तिब्बत स्नो' (Tibet Snow) है, यह एक क्रीम का नाम है।" फरमाने लगे, "तभी तो मुझे ताज्जुब हो रहा था कि जगह-जगह 'तब्बत सुनो' लिखा है लेकिन 'कुल हुवल्लाह सुनो' कहीं नहीं है।"

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तौहीद के दरजात (एकेश्वरवाद के चरण)
लेख

तौहीद के दरजात (एकेश्वरवाद के चरण)

मुस्निद अल-हिंद, इमाम-ए-अकबर हज़रत शाह वलीउल्लाह मुहद्दिस देहलवी ؒ ने इर्शाद फ़रमाया है कि अक़ीदा-ए-तौहीद की तकमील (पूर्णता) के लिए चार दर्जों की तौहीद का मानना लाज़िम है, अगर किसी भी दर्जे की तौहीद में ज़र्रा बराबर भी कमी रह जाएगी तो इंसान हरगिज़ मुवह्हिद (एकेश्वरवादी) नहीं कहलाया जा सकता, वे चार दर...