गुमनाम मगर किरदार वाले लोग

एक सबक आमोज़ (शिक्षाप्रद) पोस्...
Ummah Post
5 September, 2025

गुमनाम मगर किरदार वाले लोग

एक सबक आमोज़ (शिक्षाप्रद) पोस्ट...

घड़ी में तीन सुइयां होती हैं जिनमें से एक सुई सेकंड वाली सुई के नाम से मशहूर है।

यह सेकंड वाली सुई अपना वजूद (अस्तित्व) तो रखती है पर इसका ज़िक्र नहीं किया जाता। सब यही कहते हैं कि दस बजकर पंद्रह मिनट हो गए हैं। कभी किसी ने यूं नहीं कहा कि दस बजकर पंद्रह मिनट और चार सेकंड हुए हैं।

जबकि यह सेकंड वाली सुई बाकी दोनों सुइयों से ज़्यादा मेहनत व मशक़्क़त करती है और उन दोनों को भी आगे बढ़ने में मदद करती है।

हमारी ज़िंदगी में भी बहुत से लोग इसी सेकंड वाली सुई की मानिंद (तरह) होते हैं जिनका ज़िक्र तो कहीं नहीं होता लेकिन हमारे आगे बढ़ने में उनका किरदार (भूमिका) ज़रूर होता है।

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मनक़ूल (साभार)।

इंतखाब (चयन): इस्लामिक ट्यूब ऐप

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सख़ावत (उदारता) की एक बेमिसाल मिसाल: नवाब मुज़फ़्फ़र अली ख़ान
लेख

सख़ावत (उदारता) की एक बेमिसाल मिसाल: नवाब मुज़फ़्फ़र अली ख़ान

नाम भी मुज़फ़्फ़र था और रहते भी मुज़फ़्फ़रनगर में थे... पूरा नाम था "नवाब मुज़फ़्फ़र अली ख़ान"। मुज़फ़्फ़रनगर हिंदुस्तान में एक ज़िला है, उन भले दिनों में यह नवाब साहब की जागीर थी। नवाब साहब को इमारतें बनवाने (تعمیرات) का शौक़ था। इसी शौक़ को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने एक बहुत बड़े बाग़ के बीचों...