इमाम शाफ़ई (रहमतुल्लाही अलैहि) फ़रमाते हैं कि: 

"जो व्यक्...
Ummah Post
21 May, 2025

इमाम शाफ़ई (रहमतुल्लाही अलैहि) फ़रमाते हैं कि:

"जो व्यक्ति यह चाहता है कि अल्लाह तआला उसके दिल को खोले, उसे ज्ञान (इल्म) दे और उसे हिकमत (बुद्धिमत्ता) अता फ़रमाए, तो उसे चाहिए कि वह तन्हा (अकेला) रहे, कम खाए, और मूर्खों (अहमक़ों) के साथ-साथ ऐसे ज्ञानियों (उलेमा) से भी मिलने से बचे जो न्याय (अदल) और शिष्टाचार (आदाब) नहीं जानते।"

[मनाक़िब अश-शाफ़ई लिल-बैहक़ी: 2/172]

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मदरसा के छात्रों की पाकीज़गी
लेख

मदरसा के छात्रों की पाकीज़गी

शेख़ुल क़ुरआन मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद ज़रवली ख़ान साहब (रह.) फ़रमाते थे: मदारिस (मदरसों) के तलबा (छात्र) बहुत पाक मख़्लूक़ (पवित्र जीव) हैं। एक दिन हमारे मदरसे में एक तालिब-ए-इल्म (छात्र) को शरारत पर मैंने सज़ा दी, तो कुछ देर बाद मेरे हाथ ने हरकत करना छोड़ दिया और वह मुर्दा (बेजान) हो गया। मैंने...