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बिहार का बड़ा घोटाला: 7 से 17 वर्ष की आयु की लड़कियों का वर्षों तक शोषण, सफेदपोश अपराधियों का काला चेहरा सामने आने से भय और दहशत का माहौल

मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर में 2018 में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां एक आश्रय गृह में 7 से 17 वर्ष की आयु की 34 नाबालिग लड़कियों का वर्षों तक यौन शोषण और उत्पीड़न किया गया। इस शर्मनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया। इसका खुलासा कैसे हुआ? 2017 में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) ने बिहार के आश्रय गृहों का सर्वेक्षण किया। 2018 में आई रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मुजफ्फरपुर स्थित 'सेवा संकल्प और विकास समिति' के आश्रय गृह में 42 में से 34 लड़कियों का यौन शोषण और उत्पीड़न किया गया था। रिपोर्ट लीक होने और जन विरोध के बाद बिहार सरकार ने कार्रवाई की। जांच और गिरफ्तारियां: 29 मई, 2018 को लड़कियों को अन्य आश्रय गृहों में स्थानांतरित कर दिया गया। 31 मई को मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। पटना मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट ने दुर्व्यवहार की पुष्टि की, जिसमें कुछ लड़कियों के गर्भवती होने और गर्भपात कराने के सबूत भी मिले। बृजेश समेत ग्यारह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जो एक अखबार चलाता था और सरकारी संपर्कों का फायदा उठाता था। इस मामले की सुनवाई मुजफ्फरपुर से दिल्ली के साकेत कोर्ट में स्थानांतरित कर दी गई। पीड़ित लड़कियों ने अपने साथ हुए भयानक अत्याचारों का ब्योरा दिया है। कहानियां सुनाइए। सीबीआई ने जांच की, जिसमें एक लड़की के लापता होने की खबरें भी सामने आईं, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। 2020 में 11 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इस घोटाले ने बिहार के आश्रय गृहों के कुप्रबंधन और प्रभावशाली लोगों के गठजोड़ को उजागर किया। इसने न केवल सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठाए, बल्कि नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा के प्रति समाज को जागरूक भी किया।