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फ्रिज-फ्रीजर भी हो सकते हैं हैक: साइबर हमलों का खतरा सिर्फ फोन-कंप्यूटर तक सीमित नहीं, यूरोप के सुपरमार्केट पर संदिग्ध अटैक के बाद उठे सवाल

इंटरनेट और वाई-फाई से जुड़े उपकरण अब सिर्फ फोन और कंप्यूटर तक सीमित नहीं हैं। फ्रिज, वॉशिंग मशीन और सेंट्रल हीटिंग सिस्टम भी इसमें शामिल हैं। हाल ही में पूरे यूरोप के सुपरमार्केट पर हुए एक संदिग्ध साइबर अटैक में फ्रिज और बड़े फ्रीजर हैक हो गए। इसने कनेक्टेड डिवाइसों की सुरक्षा पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

कितना बड़ा है खतरा?

इंटरनेट से जुड़े उपकरणों को दूर से कंट्रोल करना आसान होता है, और हैकर्स कई बार इसका फायदा उठा लेते हैं।

इसका मतलब यह नहीं कि हैकर्स हर डिवाइस को कंट्रोल कर सकते हैं। घरेलू उपकरण बनाने वाली कंपनियां अपनी तकनीक को सुरक्षित बताती हैं।

एक रिसर्च के अनुसार, 2015 में सैमसंग का एक स्मार्ट फ्रिज हैकर्स के कंट्रोल में आ गया था।

सुपरमार्केट पर हुए हमले का घरेलू उपकरणों से सीधा संबंध होने का कोई सबूत नहीं है।

ब्रिटेन के साइबर डिफेंस शोधकर्ताओं ने वहां के रिटेलर्स से जुड़े 800 से ज्यादा रेफ्रिजरेशन और बिल्डिंग-कंट्रोल सिस्टम की पहचान की है, जिन्हें बाहरी इंटरनेट से कंट्रोल किया जा सकता है। इसका मतलब हैक होना नहीं है, पर कमजोर पासवर्ड या सॉफ्टवेयर की खामियों का फायदा उठाने वाले हैकर्स के निशाने पर वे आ सकते हैं।

एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?

सियारन मार्टिन (ब्रिटेन के NCSC के पूर्व प्रमुख): निर्माताओं को कनेक्टेड डिवाइस सुरक्षित बनाने के लिए और काम करना होगा। उपभोक्ताओं को डिवाइस अपडेट रखने चाहिए और जहां संभव हो, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू रखना चाहिए।

टॉम हेगेल (SentinelOne): रिटेलर्स को यह तय करना होगा कि इन उपकरणों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है, सिर्फ मरम्मत की नहीं। एक सेटिंग बदलने से फ्रीजर का सामान खराब हो सकता है।

हेलेन डिकिंसन (ब्रिटिश रिटेल कंसोर्शियम): ऐसी साइबर घटनाएं रिटेलर्स के लिए बड़ी चिंता हैं।

अप्रैल 2024 से ब्रिटेन के कानून के तहत स्मार्ट घरेलू डिवाइस बनाने वाली कंपनियों को पासवर्ड और सुरक्षा अपडेट जैसे न्यूनतम साइबर सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।

मई 2025 में ब्रिटेन के 'एम एंड एस' और 'को-ऑप' पर हुए साइबर हमले से सप्लाई में दिक्कतें आई थीं और स्टोर्स में सामान उपलब्ध नहीं था।

कारें, पावर प्लांट और वाटर सप्लाई भी दायरे में

2015 में शोधकर्ताओं ने एक जीप के इंटरनेट-जुड़े एंटरटेनमेंट सिस्टम के जरिए उसे दूर से हैक कर लिया था। बाद में ऑटो इंडस्ट्री ने इसे ठीक किया।

पावर हाउस और वाटर प्लांट की निगरानी भी बड़े पैमाने पर मोबाइल कनेक्शन से होती है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ केन मुनरो के मुताबिक ब्रिटेन की यूटिलिटी कंपनियां आमतौर पर सुरक्षा में अच्छी हैं, पर दुनिया में मानक अलग-अलग हैं। उन्हें सबसे ज्यादा चिंता छोटी और कम फंड वाली कंपनियों की है, जो अब भी पुराने सिस्टम पर निर्भर हो सकती हैं।

ओलिवियर डैलॉय (Zscaler) के अनुसार बिना सही सुरक्षा के इंटरनेट से जुड़ी कोई भी फैक्टरी या उपकरण ऐसे खतरे झेल सकता है।

आम यूजर क्या करें?

स्मार्ट डिवाइस का सॉफ्टवेयर हमेशा अपडेट रखें।

डिफॉल्ट पासवर्ड बदलें और मजबूत पासवर्ड रखें।

जहां संभव हो, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करें।