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धरती की ओर लौट रहा NASA का 'स्विफ्ट' टेलीस्कोप: क्या मुंबई-हैदराबाद को है खतरा? जानें वैज्ञानिकों की राय

NASA का 1,500 किलोग्राम वजनी 'नील गेहरेल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी' स्पेस टेलीस्कोप 4 नवंबर को पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा दाखिल होने वाला है। यह करीब 22 साल से काम कर रहा है। ज्यादा गर्मी से इसका ज्यादातर हिस्सा जल जाएगा, लेकिन कुछ टुकड़े सतह तक पहुंच सकते हैं।

कब होगी वापसी?

NASA के अनुसार, टेलीस्कोप के भारतीय समयानुसार दोपहर करीब 2 बजे वायुमंडल में प्रवेश करने की संभावना है। हालांकि इस समय में करीब 11 घंटे की अनिश्चितता हो सकती है।

कहां तक हो सकता है असर का दायरा?

संभावित क्षेत्र 20.6 डिग्री दक्षिण से 20.6 डिग्री उत्तर अक्षांश के बीच है।

इसमें अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य व दक्षिण अमेरिका के हिस्से आते हैं।

भारत में यह दायरा पश्चिम में दमन और पूर्व में ओडिशा के कटक को जोड़ने वाली काल्पनिक रेखा के दक्षिण तक है। मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई इसी दायरे में हैं।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इन शहरों पर सीधा खतरा है। असली प्रवेश बिंदु इस पर निर्भर करेगा कि वायुमंडल में आते समय यान की स्थिति क्या है।

क्या मलबा जमीन तक पहुंचेगा?

NASA मिशन के चीफ साइंटिस्ट ब्रैड सेंको के मुताबिक कुछ हिस्से बच सकते हैं।

एस्ट्रोफिजिसिस्ट जोनाथन मैकडॉवेल को हैरानी होगी, अगर 100 किलो से ज्यादा हिस्सा बच जाए।

पृथ्वी का करीब 70% हिस्सा पानी से ढका है, इसलिए मलबे के समुद्र में गिरने की संभावना ज्यादा है। ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के ब्रैड टकर के अनुसार, किसी को चोट लगने या ढांचे को नुकसान की संभावना न के बराबर है।

क्या ISRO रखेगा नजर?

ISRO श्रीहरिकोटा में 'मल्टी-ऑब्जेक्ट ट्रैकिंग रडार' (MOTR) चलाता है, जो सैटेलाइट्स और रॉकेट हिस्सों की अंतिम कक्षीय गतिविधियों को ट्रैक कर सकता है। हालांकि ISRO विशेष रूप से स्विफ्ट पर नजर रख रहा है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

22 साल का वैज्ञानिक सफर

20 नवंबर 2004 को लॉन्च हुआ यह यान शुरू में सिर्फ 2 साल के मिशन के लिए बना था। पहले इसे 'स्विफ्ट गामा-रे बर्स्ट एक्सप्लोरर' कहा जाता था।

इसने 2,000 से ज्यादा गामा-रे बर्स्ट खोजे और करीब 1,400 सुपरनोवा का अध्ययन किया।

मिशन बढ़ाने और अनियंत्रित वापसी रोकने की कोशिशों के बावजूद अब यह अपनी आखिरी वापसी की ओर है।

नोट: समय और स्थान को लेकर अनुमान बदल सकते हैं। ताजा जानकारी के लिए NASA और ISRO की आधिकारिक सूचनाएं देखें।