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पश्चिम एशिया युद्ध के मुहाने पर: अमेरिका का ईरानी रडार ठिकानों पर बड़ा हमला; जवाब में ईरान ने कुवैत और बहरीन पर बरसाईं बैलिस्टिक मिसाइलें; ट्रंप और खुफिया एजेंसियों के दावों में विरोधाभास; 2.29 लाख करोड़ की फ्रीज संपत्तियों पर बातचीत ठप

अंतरराष्ट्रीय डेस्क: विशेष रिपोर्ट

शनिवार, 6 जून 2026

पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) का क्षेत्र एक बार फिर एक खौफनाक और व्यापक क्षेत्रीय युद्ध के मुहाने पर पहुंच गया है। वैश्विक स्तर पर जारी राजनयिक प्रयासों और पाकिस्तान की कथित मध्यस्थता में हो रही शांति वार्ताओं की पृष्ठभूमि के बावजूद, पिछले 24 घंटों के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच सीधे सैन्य टकराव ने स्थिति को बेहद विस्फोटक बना दिया है। अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास ईरानी सैन्य ठिकानों पर बमबारी और इसके जवाब में ईरान की ओर से खाड़ी देशों (कुवैत और बहरीन) में स्थित अमेरिकी और सहयोगी ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार ने क्षेत्र में सुरक्षा के तमाम इंतजामों को हिलाकर रख दिया है।

एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा कर रहे हैं कि उन्होंने ईरान की कमर तोड़ दी है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी खुफिया एजेंसियां और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाएं ट्रंप के इन दावों को खारिज कर रही हैं। इस खूनी टकराव के साथ ही, लेबनान में इजरायली आक्रामकता भी चरम पर पहुंच चुकी है जहां मासूम बच्चों और राहत कर्मियों सहित दर्जनों लोग हवाई हमलों का शिकार बने हैं।

1. सैन्य टकराव का विवरण: अमेरिका का गोरोक और कशम पर हमला

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा जारी एक आपातकालीन बयान के अनुसार, अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने एक संयुक्त अभियान के दौरान ईरान के अत्यंत संवेदनशील सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह कार्रवाई "रक्षात्मक और दंडात्मक" प्रकृति की थी, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों और अमेरिकी बलों की रक्षा करना था।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ड्रोन गिराए जाने से शुरू हुआ विवाद

सेंटकॉम के अनुसार, विवाद तब शुरू हुआ जब ईरान के चार अत्याधुनिक आत्मघाती हमलावर ड्रोन (Kamikaze Drones) अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर उड़ान भर रहे थे और अमेरिकी युद्धपोतों के बेहद करीब पहुंच गए थे। खतरे को भांपते हुए अमेरिकी रक्षा प्रणाली ने इन चारों ईरानी ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया।

इस घटना के तुरंत बाद, भविष्य में ऐसे किसी भी ईरानी हवाई हमले को पहले ही रोकने के लिए, अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के रणनीतिक द्वीपों गोरोक और कशम पर स्थित ईरानी रडार ठिकानों पर भीषण बमबारी की। इन रडार ठिकानों को ईरानी तटीय रक्षा का दिल माना जाता है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं।

2. ईरान का खौफनाक जवाबी हमला: कुवैत और बहरीन पर बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार

अमेरिका के इस हवाई हमले के जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पारंपरिक सख्त रुख अपनाते हुए कुछ ही घंटों के भीतर एक बड़े जवाबी अभियान की शुरुआत कर दी। ईरान ने घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास "दुश्मन के ठिकानों" को निशाना बनाने के लिए उसकी मिसाइल फोर्स ने कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं।

कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया

अमेरिकी सुरक्षा स्रोतों और सेंटकॉम ने पुष्टि की है कि ईरान ने खाड़ी में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों और ठिकानों को निशाना बनाने के लिए 7 अत्याधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इन मिसाइलों का रुख मुख्य रूप से कुवैत और बहरीन की तरफ था, जहां अमेरिकी सेना के बड़े केंद्र मौजूद हैं।

अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली (Patriot Missile Defense System) ने इस हमले के दौरान मुस्तैदी दिखाई:

- छह मिसाइलें हवा में ही नष्ट की गईं: अमेरिकी एंटी-मिसाइल सिस्टम ने इन सात में से 6 ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही (Mid-Air Interception) सफलतापूर्वक मार गिराया।

- सातवीं मिसाइल लक्ष्य तक पहुंचने में विफल: सेंटकॉम के अनुसार, सातवीं ईरानी मिसाइल तकनीकी खराबी या अमेरिकी जैमिंग सिस्टम के कारण अपने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही विफल होकर गिर गई। इस हमले में किसी बड़े जानी नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन खाड़ी देशों में दहशत फैल गई है।

3. राष्ट्रपति ट्रंप के दावे बनाम अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट: हकीकत क्या है?

इस सैन्य कार्रवाई के बाद वाशिंगटन में मीडिया से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चिरपरिचित अंदाज में बेहद आक्रामक और विजयी रुख अपनाया। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी हवाई हमलों और सख्त आर्थिक प्रतिबंधों ने ईरान के सैन्य ढांचे को नेस्तनाबूद कर दिया है।

ट्रंप का दावा: ईरान की सिर्फ 22 फीसदी मिसाइल ताकत बची

डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति कार्यालय से जारी बयान में कहा:

"हमारे हालिया हमलों के बाद ईरान की मिसाइल और रक्षात्मक क्षमताएं पूरी तरह से पंगु हो चुकी हैं। हमारी खुफिया जानकारी की शुरुआती रिपोर्ट बताती हैं कि ईरान अब इस स्थिति में नहीं रहा कि वह कोई लंबी जंग लड़ सके। उसके पास अपने मूल मिसाइल हथियारों का अब सिर्फ 21 से 22 प्रतिशत हिस्सा ही बचा है। बाकी सब या तो तबाह हो चुका है या बेकार कर दिया गया है।"

न्यूयॉर्क टाइम्स का सनसनीखेज खुलासा: क्या ट्रंप का दावा गलत है?

हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप के इस बड़े दावे के कुछ ही घंटों बाद अमेरिका के सबसे प्रतिष्ठित अखबार 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' (The New York Times) ने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आंतरिक स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर एक वैकल्पिक और चौंकाने वाली रिपोर्ट प्रकाशित कर दी।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी खुफिया समुदाय राष्ट्रपति ट्रंप के इस आकलन से सहमत नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि:

- 30 मिसाइल ठिकाने फिर सक्रिय: ईरान पर हुए पिछले हमलों के बावजूद, ईरानी इंजीनियरों और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अपने कुल 33 मिसाइल ठिकानों में से 30 ठिकानों को फिर से पूरी तरह से सक्रिय कर लिया है।

- 70 फीसदी भंडार अब भी सुरक्षित: खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान का असली मिसाइलों का भंडार (Missile Stockpile) अब भी बड़े पैमाने पर सुरक्षित है और ईरान के पास अपनी मिसाइल ताकत का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा बिल्कुल सही-सलामत और तैयार स्थिति में मौजूद है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप का यह बयान जमीन पर मौजूद हकीकत से ज्यादा "राजनीतिक नैरेटिव और डैमेज कंट्रोल" की एक कोशिश मालूम होता है।

4. पिछले 24 घंटों की पांच बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय अपडेट्स

इस सैन्य टकराव के समानांतर, वैश्विक परिदृश्य पर पांच ऐसी महत्वपूर्ण प्रगति हुई हैं जो पश्चिम एशिया के भविष्य का निर्धारण करेंगी:

अ) ट्रंप और ईरानी सर्वोच्च नेता की संभावित मुलाकात और गुप्त सैन्य योजना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक और बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच कोई व्यापक और स्थायी शांति समझौता तय हो जाता है, तो वह ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई से सीधे मुलाकात करने के लिए तैयार हैं। इसके साथ ही ट्रंप ने एक खौफनाक राज से पर्दा उठाते हुए खुलासा किया कि अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के भंडारों को अपने कब्जे में लेने के लिए अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज को सीधे ईरान भेजने की सैन्य योजना पर गंभीरता से विचार किया था। हालांकि, इस मिशन में शामिल अमेरिकी सैनिकों की जान के अत्यधिक खतरे और तीसरे विश्व युद्ध के छिड़ने के डर से इस योजना को अंतिम समय पर रद्द कर दिया गया।

ब) ईरान के सर्वोच्च नेता का बड़ा कदम: 2000 से अधिक कैदियों की माफी

तेहरान से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने एक विशेष शाही फरमान जारी करते हुए देश की विभिन्न जेलों में बंद 2,000 से अधिक कैदियों की माफी या उनकी सजा में बड़ी कटौती को मंजूरी दे दी है। हालांकि, ईरानी न्यायपालिका ने स्पष्ट किया है कि इस माफी का लाभ उन कैदियों को नहीं मिलेगा जो विदेशी एजेंसियों के लिए जासूसी (Espionage), तोड़फोड़ और ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ गंभीर अपराधों में संलिप्त पाए गए हैं। इस कदम को देश के आंतरिक हालातों को शांतिपूर्ण रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

ज) युद्धविराम वार्ता के बावजूद लेबनान में इजरायली क्रूर बमबारी जारी

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी युद्धविराम के प्रयासों और राजनयिक दबाव को पूरी तरह से खारिज करते हुए, इजरायल की नेतन्याहू सरकार ने दक्षिणी लेबनान पर अपने हवाई हमलों का सिलसिला जारी रखा हुआ है। पिछले 24 घंटों के दौरान दक्षिणी लेबनान के कई रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया, जिसके परिणामस्वरूप कम से कम चार नागरिकों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दर्जनों अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय अस्पतालों में आपातकाल लागू कर दिया गया है।

द) अमेरिकी प्रतिबंधों का असर: ईरान के तेल निर्यात में 84 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट

वैश्विक नौवहन (शिपिंग) पर नजर रखने वाली संस्था 'लॉयड्स लिस्ट' (Lloyd's List) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों के कड़े पहरे के कारण मई के महीने में ईरान के कानूनी कच्चे तेल (Crude Oil) के निर्यात में 84 प्रतिशत की रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है। इस आर्थिक नुकसान और अमेरिकी नौसेना की कार्रवाइयों से बचने के लिए ईरान ने अब अपनी रणनीति बदल दी है। ईरान अब तेल की आपूर्ति के लिए बड़े टैंकरों (VLCC) के बजाय छोटे जहाजों का इस्तेमाल कर रहा है ताकि वह अंतरराष्ट्रीय समुद्रों में अमेरिकी रडारों की नजरों से बचकर गुप्त तरीके से तेल बेच सके।

ह) इजरायल के खिलाफ आयरलैंड का बड़ा राजनयिक एक्शन: मंत्रियों के देश में प्रवेश पर प्रतिबंध

यूरोपीय देश आयरलैंड ने फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायल के जारी नरसंहार और आक्रामक बयानों पर कड़ा रुख अपनाते हुए इजरायल के दो अत्यंत कट्टरपंथी और दक्षिणपंथी मंत्रियों—गृह मंत्री इतामार बेन-गवीर और वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच—पर अपने देश में प्रवेश पर स्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। आयरिश सरकार ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि इन दोनों इजरायली नेताओं के नस्लवादी बयानों ने गाजा और वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों के खिलाफ नफरत, हिंसा और मानवाधिकारों के उल्लंघन को बढ़ावा दिया है, इसलिए उन्हें आयरलैंड की धरती पर कदम रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

5. 2.29 लाख करोड़ रुपये की फ्रीज संपत्तियां: अमेरिका-ईरान शांति वार्ता का असली गतिरोध

अमेरिका और ईरान के बीच परोक्ष (अप्रत्यक्ष) बातचीत की विफलता और हालिया सैन्य हमलों के पीछे की सबसे बड़ी आर्थिक वजह अब सामने आ चुकी है। सीएनएन (CNN) की एक विशेष खोजी रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच प्रस्तावित शांति समझौता तब तक अंतिम रूप नहीं ले सकता जब तक डोनाल्ड ट्रंप ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को बहाल नहीं करते।

ईरान की 24 बिलियन डॉलर की मांग, गेंद ट्रंप के पाले में

अमेरिका ने ईरान की लगभग 24 बिलियन डॉलर (पाकिस्तानी/भारतीय मुद्रा में लगभग 2.29 लाख करोड़ रुपये) की संपत्तियों को विभिन्न वैश्विक बैंकों में फ्रीज (जब्त) कर रखा है। ईरान के सर्वोच्च नेता के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार और पूर्व रिवोल्यूशनरी गार्ड्स प्रमुख मोहसिन रजाई ने वर्तमान स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा:

"अमेरिका के साथ शांति वार्ता इस समय पूरी तरह से गतिरोध (डेडलॉक) का शिकार हो चुकी है। इस गतिरोध को हल करना अब पूरी तरह से राष्ट्रपति ट्रंप के हाथ में है। हमने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है, अब गेंद ट्रंप के पाले में है।"

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की मांग है कि जैसे ही दोनों देश अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर करें, अमेरिका तुरंत पहली किस्त के रूप में 12 बिलियन डॉलर जारी करे, और शेष 12 बिलियन डॉलर समझौते के अगले चरणों के कार्यान्वयन के बाद जारी किए जाएं। दूसरी ओर, अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों और पेंटागन को गंभीर चिंता है कि अगर इस चरण पर ईरान को इतनी बड़ी रकम दे दी गई, तो ईरान पर आर्थिक दबाव खत्म हो जाएगा और वह इस रकम का बड़ा हिस्सा अपने परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रॉक्सी (हिजबुल्लाह और हूतियों) को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल करेगा।

6. लेबनान में इजरायली बर्बरता: हालिया हमलों में नगर पालिका पार्षद और बच्चों सहित 21 की मौत

पश्चिम एशिया के इस पूरे विवाद का सबसे दुखद पहलू लेबनान है, जहां मासूम नागरिक लगातार अपनी जान गंवा रहे हैं। लेबनान की आधिकारिक समाचार एजेंसी 'एनएनए' (NNA) का हवाला देते हुए सीएनएन ने बताया कि शुक्रवार को दक्षिणी लेबनान पर हुए इजरायली हवाई हमलों में 21 लोग मारे गए।

राहत कर्मियों और बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप

मारे गए लोगों में एक स्थानीय नगर पालिका परिषद के सम्मानित सदस्य, दो मासूम सीरियाई शरणार्थी बच्चे और सबसे दुखद रूप से एक चिकित्सा कर्मी (पैरामेडिक) शामिल है जो इजरायली बमबारी के बाद घायलों को चिकित्सा सहायता पहुंचाने और बचाने के लिए मौके पर गया था।

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस घटना पर कड़ा विरोध जताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि इजरायल द्वारा जानबूझकर चिकित्सा कर्मियों, एम्बुलेंसों और राहत कर्मियों को निशाना बनाना जिनेवा कन्वेंशन और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (International Humanitarian Law) का खुला और सबसे गंभीर उल्लंघन है, जिसे किसी भी स्थिति में सैन्य रक्षा नहीं कहा जा सकता।

पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि अब युद्ध सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह जमीन, हवा और समुद्र में फैल चुका है। अगर अमेरिका ने ईरान की फ्रीज संपत्तियों पर लचीलापन नहीं दिखाया और ईरान के मिसाइल हमलों का सिलसिला नहीं रुका, तो आने वाले दिन पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और शांति के लिए विनाशकारी साबित हो सकते हैं।