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हिमाचल प्रदेश में यात्रियों को ले जा रही बस पर चट्टान गिरने से 15 लोगों की मौत हो गई। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने दुख व्यक्त किया।

हिमाचल प्रदेश: बालू पुल के पास बस पर भूस्खलन, 15 की मौत, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने शोक व्यक्त किया। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में बालू पुल के पास एक पहाड़ी से मिट्टी और चट्टानों के भूस्खलन से यात्रियों से भरी बस मलबे के ढेर में तब्दील हो गई, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई। भारी बारिश से प्रभावित इस क्षेत्र में राहत कार्य जारी है, जहां सेना, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन बचाव कार्यों में लगे हुए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खु ने शोक व्यक्त किया, साथ ही सहायता राशि की घोषणा भी की गई। दुर्घटना का विवरण: 4 सितंबर, 2025 की दोपहर को, बिलासपुर के बारथिन के पास बालू पुल पर एक पहाड़ी से गिरते मलबे की चपेट में यात्रियों से भरी एक निजी बस (जिसमें 30 यात्री शामिल थे) आ गई। भूस्खलन से बस मलबे के नीचे दब गई, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई और 10 लोग घायल हो गए। उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि "15 शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि तीन लोगों को जिंदा बाहर निकाला गया है, जिनका इलाज चल रहा है।" दमकल विभाग, पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें मलबे से लोगों को बचाने में व्यस्त हैं, लेकिन लगातार बारिश ने काम को और मुश्किल बना दिया है। चंडीगढ़ से राजस्थान जा रहे यात्री इस हादसे की चपेट में आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मलबा ज़ोरदार धमाके के साथ गिरा और बस पल भर में मलबे के नीचे दब गई। यह घटना हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी रास्तों पर बढ़ते भूस्खलन की घटनाओं को दर्शाती है, जो जलवायु परिवर्तन और खराब निर्माण के कारण हो रही हैं। राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री मोदी ने X पर लिखा: 'हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में हुए हादसे से दुखी हूं। मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं।' प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिवार को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और गृह मंत्री अमित शाह ने भी अपनी संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने तत्काल सहायता के आदेश दिए और जिला प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा। “हमारे लोगों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। राहत दल हर संभव प्रयास कर रहे हैं।” — सुखविंदर सिंह सुक्खू। संदर्भ: द हिंदू, इंडिया टुडे, टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स, द इंडियन एक्सप्रेस, X-पोस्ट