"एक ग़ज़ा ही आज़ाद था, सो मर्दाना वार (बहादुरी से) लड़ा।
बाक़ी ग...
Ummah Post
9 April, 2025

"एक ग़ज़ा ही आज़ाद था, सो मर्दाना वार (बहादुरी से) लड़ा।

बाक़ी गुलाम थे, सो सर भी न उठा सके..!😭

FreeGaza"

Share this article
कीमती घड़ी और पिता की सीख (अपनी कीमत पहचानो)
लेख

कीमती घड़ी और पिता की सीख (अपनी कीमत पहचानो)

एक पिता ने अपने जीवन के आखिरी वक्त में अपने बेटे को पास बुलाया, उसे एक पुरानी कलाई घड़ी सौंपी और कहा: "मेरे बेटे, यह घड़ी दो सौ साल से भी ज़्यादा पुरानी है। यह तुम्हारे परदादा की है। इसे तुम्हें सौंपने से पहले, मैं चाहता हूँ कि तुम इसे गली के मोड़ पर मौजूद घड़ीसाज़ (घड़ी ठीक करने वाले) के पास ले जाओ...