*मोटर साइकिल*
मोटर साइकिल एक लीटर पेट्रोल में 65 से 70 किलोमीटर चलती थी, अचानक उसका एवरेज ख़राब हो गया और 45-46 पर आ गया। दो-तीन मैकेनिकों को दिखाने के बावजूद मामला काबू में न आया।
फिर एक मैकेनिक ने अपनी बेबसी स्वीकार करते हुए एक सबसे सीनियर मैकेनिक के पास भेज (रेफर कर) दिया। चुनाँचे (तदनुसार) बाइक वहाँ ले जाई गई। उसने सारी बात सुनी और "छोटू" को आवाज़ दी।
"छोटू" से छोटा प्लग स्पैनर मंगवाया।
कारबोरेटर से एक प्लग खोलकर "छोटू" से कहा कि इसे बफ़ (साफ़) करा कर लाओ।
वह एक मिनट में बफ़ करा कर ले आया। मैकेनिक ने प्लग उसी जगह पर वापस लगा दिया और कहा, "जाओ, इंशाअल्लाह मसला हल हो जाएगा।" पैसे भी उसने कुछ नहीं लिए।
कुछ दिनों बाद जब गौर किया तो गाड़ी फिर से 70 किलोमीटर का एवरेज दे रही थी।
मैं शुक्रिया अदा करने के लिए गया तो पूछा, "क्या ख़राबी (फॉल्ट) थी?"
मैकेनिक बोला:
"प्लग में कार्बन आ गया था।"
"सिर्फ़ कार्बन आ जाने से इतना असर पड़ा?"
"जी हाँ...
दिलों पर भी कार्बन आ जाया करता है। तब दिल किसी नेकी (पुण्य) की तरफ़ माइल (आकर्षित) नहीं होता।
ऐसे कार्बन को दूर करने के लिए इस्लाम ने नुस्खा बता दिया है:
दुरूद शरीफ़, ज़िक्र, नमाज़, और तर्जुमे (अनुवाद) के साथ क़ुरआन की तिलावाते।"
- मन्क़ूल (उद्धृत)