"जो दिन बच गए हैं, उन्हें अच्छे से गुज़ारो; ताकि जो दिन गुज़...
Ummah Post
25 March, 2025

"जो दिन बच गए हैं, उन्हें अच्छे से गुज़ारो; ताकि जो दिन गुज़र चुके हैं, उनकी ग़लतियों की माफ़ी हो जाए;

जो बाक़ी है, उसे ग़नीमत (वरदान) समझो;

क्योंकि तुम्हें नहीं पता कि अल्लाह की रहमत (कृपा) कब आ जाए!"

इमाम हसन अल-बसरी रहमतुल्लाह अलैह

(मिन्हाज अल-क़ासिदीन: 1/343)

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उलेमा (विद्वान) ही औलिया (अल्लाह के मित्र) हैं
लेख

उलेमा (विद्वान) ही औलिया (अल्लाह के मित्र) हैं

यह्या बिन यह्या बयान करते हैं: जब इमाम मालिक (रहमतुल्लाह अलैह) की मृत्यु-शय्या की बीमारी लंबी हो गई और अंतिम समय करीब आ गया, तो मदीना मुनव्वरा और अन्य शहरों से सभी उलेमा (विद्वान) और फुकहा (न्यायविद) इमाम साहब के घर पर जमा हो गए ताकि वे समय के इमाम से आखिरी मुलाकात का लाभ उठा सकें और उनकी वसीयतों (उ...