"जब दुख शिद्दत (तीव्रता) अख्तियार कर जाएं, तो तब बोलने की ग़...
Ummah Post
25 March, 2025

"जब दुख शिद्दत (तीव्रता) अख्तियार कर जाएं, तो तब बोलने की ग़लती मत करना। यही लम्हात (पल) सब्र के होते हैं—वह लम्हे जब दोनों जहान का मालिक हमारे साथ हो जाता है। और जब वह साथ हो जाता है, तो इंसान को फ़र्श से अर्श (ज़मीन से आसमान) पर पहुँचा दिया जाता है। यह मौक़ा गंवाने का नहीं, सब कुछ पाने का होता है।" _💯💫

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झूठी उम्मीद और अधूरे वादे का घातक अंजाम
लेख

झूठी उम्मीद और अधूरे वादे का घातक अंजाम

एक आदमी कई रातें सख्त सर्दी में आराम से सोता रहा। एक दिन किसी राहगीर ने गुजरते हुए उससे कहा: "मैं तुम्हें एक गर्म रज़ाई लाकर दूंगा"!! वह राहगीर अपनी मंज़िल को चला गया और रज़ाई लाने का वादा भूल गया, बूढ़ा आदमी उसका इंतज़ार करते हुए सर्दी से मर गया। लोगों को उसकी लाश के पास एक लिखा हुआ पर्चा (नोट)...