ताबिई हसन बसरी रहमतुल्लाह अलैह का बयान है कि मैंने उस्मान बिन अफ़्फ़ान रज़ियल्लाहु अन्हु को एक चादर ओढ़े मस्जिद में क़ैलूला (दोपहर का आराम) करते देखा; उनके आस-पास कोई न था और वह वक़्त के अमीर-उल-मोमिनीन थे!
(फ़ज़ाइलुस सहाबा लि-अहमद, ८००)
ताबिई हसन बसरी रहमतुल्लाह अलैह का बयान है कि मैंने उस्मान बिन अफ़्फ़ान रज़ियल्लाहु अन्हु को एक चादर ओढ़े मस्जिद में क़ैलूला (दोपहर का आराम) करते देखा; उनके आस-पास कोई न था और वह वक़्त के अमीर-उल-मोमिनीन थे!
(फ़ज़ाइलुस सहाबा लि-अहमद, ८००)