क़ुरआन में दो सूरतें 'वैल' (तबाही/अफ़सोस) से शुरू हुई हैं।
{ वैलुल-लिल मुतफ़्फ़िफ़ीन }।
{ वैलुल-लिकुल्लि हुमज़तिल-लुमज़ह }।
पहली लोगों के अमवाल (माल/संपत्ति) से मुतअल्लिक़ (संबंधित) है,
दूसरी लोगों की इज़्ज़तों/किरदार से मुतअल्लिक़ है।
लिहाज़ा दोनों के क़रीब मत जाइए।