*"इक़रा बिस्मी रब्बिका"* (पढ़ अपने रब के नाम से) का इख़्तिताम...
Ummah Post
22 March, 2025

*"इक़रा बिस्मी रब्बिका"* (पढ़ अपने रब के नाम से) का इख़्तिताम (अंत) *"वस्जुद वक़्तरिब"* (और सज्दा कर और क़रीब हो जा) पर होता है। जिस पढ़ाई का नतीजा क़ुर्ब-ए-इलाही (अल्लाह की नज़दीकी) न हो, वो इस्लाम का मन्शा (उद्देश्य) नहीं है...

*📝 तअम्मुलात-ए-क़ुरआनिया (क़ुरआनी चिंतन)*

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फ़तह-ए-मक्का: रहमतुल-लिल-आलमीन ﷺ की दया और माफ़ी के ऐतिहासिक दृश्य
लेख

फ़तह-ए-मक्का: रहमतुल-लिल-आलमीन ﷺ की दया और माफ़ी के ऐतिहासिक दृश्य

फ़तह-ए-मक्का (मक्का की विजय) के मौक़े पर जगह-जगह हुज़ूर रहमतुल लिल आलमीन ﷺ (सारे संसार के लिए दया होने) के जलवे नज़र आते हैं। बल्कि वास्तविकता यह है कि मक्का की विजय का सबसे बड़ा कारण ही वह घटना बनी जिसने आपके दर्दभरे और मानवता-प्रेमी दिल को तड़पा दिया था। सीरत-निगार (जीवनी लेखक) लिखते हैं: सन् ६...