क़ायदे वफ़ाक़ हज़रत मौलाना क़ारी हनीफ़ जालंधरी साहब की अपने इदारे (संस्थान) के सालाना इज्तिमा (वार्षिक सभा) में क़ायदे जमीअत मौलाना फ़ज़लुर रहमान साहब, शाहीन-ए-ख़त्मे नबुव्वत हज़रत मौलाना अल्लाह वसाया साहब, हज़रत शेख़ मुफ्ती मोहम्मद हसन साहब की मौजूदगी में गुस्ताख़ान-ए-रसूल (रसूल की शान में गुस्ताख़ी करने वालों) और उनके हिमायतियों के ख़िलाफ़ अहम क़रारदाद (प्रस्ताव) पेश।
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