✍ अहल-ए-दिल (धर्मपरायण लोगों) को तड़पा देने वाले अश्आर (शेर)...
Ummah Post
13 January, 2025

✍ अहल-ए-दिल (धर्मपरायण लोगों) को तड़पा देने वाले अश्आर (शेर)!

रह के दुनिया में बशर (मनुष्य) को नहीं ज़ेबा (उचित) ग़फ़लत,

मौत का ध्यान भी लाज़िम (अनिवार्य) है कि हर आन (पल) रहे।

जो बशर आता है दुनिया में ये कहती है क़ज़ा (मौत/भाग्य),

मैं भी पीछे चली आती हूँ ज़रा ध्यान रहे।

(यह अश्आर हज़रत हकीमुल उम्मत हज़रत थानवी ؒ की ख़ानक़ाह में लिखे हुए थे)

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हे ईश्वर! मेरा नूर मुझे लौटा दे!!
लेख

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(नोट: इस घोषणापत्र के संबोधित व्यक्ति केवल शरिया विज्ञान (उलूम-ए-शरीयत) के छात्र हैं।) आरिफ़ों (अल्लाह की पहचान रखने वालों) ने शरिया के ज्ञान को इस तरह परिभाषित किया है कि यह अल्लाह का नूर (प्रकाश) है जो बंदे के सीने में रोशन हो जाता है। यह नूर दिल में चिराग की लौ की तरह पूरी तरह महसूस होता है। ब...