♦️♦️ *इमाम मालिक की बेटी का इल्मी शौक़ (शैक्षणिक रुचि)* ♦️♦️...
Ummah Post
11 January, 2025

♦️♦️ *इमाम मालिक की बेटी का इल्मी शौक़ (शैक्षणिक रुचि)* ♦️♦️

हज़रत इमाम मालिक (रहमतुल्लाही अलैहि) के बारे में आता है कि जब वह दरस (व्याख्यान) दिया करते थे और लोग उनके सामने मस्जिद-ए-नबवी में बैठकर हदीस शरीफ़ सुना और पढ़ा करते थे, तो वहाँ एक जगह परदा लगा हुआ होता था और उसके पीछे आपकी बेटी बैठी होती थी। वह हदीस शरीफ़ की तालिबा (छात्रा) थीं। कभी-कभी कोई व्यक्ति क़िरात (पाठ) करते हुए अगर कहीं ग़लती कर जाता, तो उनकी बेटी परदे के पीछे से लकड़ी पर लकड़ी मारकर आवाज़ पैदा करतीं। जब लकड़ी की आवाज़ आती तो इमाम मालिक (रहमतुल्लाही अलैहि) फ़ौरन समझ जाते कि पढ़ने वाले ने कहीं ग़लती की है। चुनाँचे उनकी बेटी उस दौर के बड़े-बड़े उलेमा (विद्वानों) की ग़लतियों को भी दुरुस्त (ठीक) कर दिया करती थीं। अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने उनको इतना इल्मी मक़ाम (शैक्षणिक दर्जा) अता किया था!! उस दौर में औरतों को बहुत शौक़ हुआ करता था। वे क़ुरआन अज़ीज़ की भी आलमा होती थीं और हदीस मुबारका की भी आलमा होती थीं। उनकी ज़िंदगी क़ुरआन करीम की ख़िदमत में गुज़रा करती थी। उनकी शुरू से तरबियत (परवरिश) ही ऐसी बनाई जाती थी...!!

🎤 हज़रत मौलाना पीर ज़ुल्फ़िकार अहमद साहब नक़्शबंदी (दामत बरकातहुम)...!!

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लेख

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✍🏻मुलाज़िम बहुत ही आज्ञाकारी था। मालिक ने खुश होकर उसकी पांच हजार तनख्वाह बढ़ा दी। उसकी आज्ञाकारिता में कोई फ़र्क नहीं आया, लेकिन वह बहुत ज़्यादा शुक्रगुज़ार भी नहीं हुआ। मालिक को बहुत ग़ुस्सा आया कि मैंने इसकी तनख्वाह बढ़ाई लेकिन इसने अच्छे से शुक्रिया भी अदा नहीं किया। उसने अगले महीने तन...