"किसी की अपनी मर्जी पर नाराज़गी कोई हक़ नहीं मेरा;
खुदी (आत...
Ummah Post
20 December, 2024

"किसी की अपनी मर्जी पर नाराज़गी कोई हक़ नहीं मेरा;

खुदी (आत्मसम्मान) के दायरा-ए-हुक़ूक़ से तजावुज़ (उल्लंघन) कोई शौक़ नहीं मेरा।"

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एक नौजवान की इस्तिकामत (दृढ़ता)
लेख

एक नौजवान की इस्तिकामत (दृढ़ता)

समरकंद के इसी सफर में एक आलिम एक नौजवान को इस आजिज़ (शेख पीर ज़ुल्फ़िकार अहमद नक़्शबंदी) से मिलाने के लिए लाए और बताया कि यह वह खुश-नसीब नौजवान है जो रूसी इंकलाब (क्रांति) के ज़माने में पांच मर्तबा अज़ान देकर खुलेआम नमाज़ें पढ़ता था। यह सुनकर इस आजिज़ को हैरत हुई और पूछा: "वह कैसे?" उस नौजवान ने अपन...