तस्वीर में: एक व्यक्ति ने अपने व्यक्तिगत दृष्टिकोण से अपना "उचित" हिस्सा लेने का फैसला किया, और इस प्रक्रिया में दूसरों के हिस्से को बर्बाद कर दिया। यह व्यक्ति आपको कसम खाकर कहेगा कि उसने केवल अपना हक लिया है, और वह वास्तव में सच बोल रहा होगा, लेकिन वह उन लोगों में से है जो फसाद (अशांति) फैलाते हैं।
आपको अपना हक लेने का पूरा अधिकार है,
लेकिन आपको यह अधिकार नहीं है कि आप इसे ऐसे तरीके से लें जो आपके अनुसार उचित हो और दूसरों के अधिकारों को नुकसान पहुँचाए।
यही अधिकार के उपयोग में ज़्यादती (दुरुपयोग) है।