जो जितनी तवज्जो के काबिल हो उसको उतनी ही अहमियत दो, कमज़र्फ...
Ummah Post
25 November, 2024

जो जितनी तवज्जो के काबिल हो उसको उतनी ही अहमियत दो, कमज़र्फ लोगों का हद से ज़्यादा ख्याल रखोगे तो अपनी अहमियत खो दोगे।

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हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) का एक वाक़या और पिता के मित्रों का सम्मान
लेख

हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) का एक वाक़या और पिता के मित्रों का सम्मान

हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) एक बार सफ़र पर जा रहे थे, ग़ालिबन (शायद) हज या उमरे का सफ़र था। साहिबे-हैसियत (धनी) अरबों की आदत के मुताबिक़, आप सफ़र पर जाते हुए सवारी के ऊँट के साथ एक खच्चर नुमा गधा भी ले गए (अरबों के गधे हमारे यहाँ के गधों की तरह नहीं होते, बल्कि हमारे यहाँ के खच्चर...