नंबर 1: सुबह का नाश्ता उपलब्ध है।
विवरण: नाश्ता सुबह ही किया जाता है। रात का नाश्ता या दोपहर का नाश्ता जैसी कोई चीज़ नहीं होती, इसलिए केवल यही सही है कि "नाश्ता उपलब्ध है।"
नंबर 2: झूठे आरोप (झूठे इल्ज़ामात)।
विवरण: क्या आपने कभी सच्चे आरोप सुने हैं?? नहीं?? तो सही शब्द भी केवल "आरोप" (इल्ज़ामात) ही है, न कि झूठे आरोप।
कहावतें/लोकोक्तियाँ (ज़रब-उल-मिसाल):
नंबर 1: आदमी आदमी पर गिरता है।
अर्थ: बहुत ज़्यादा भीड़, रश, या हुजूम होना।
प्रयोग: अंदरूनी शहर (पुराने शहर) का तो पूछिए ही मत, जहाँ आदमी आदमी पर गिरता है। ऐसी जगहों से दिल घबराता है, इत्यादि।
नंबर 2: पेट से पाँव निकालने लगे हैं।
अर्थ: ग़लत, नालायक या मर्यादा से बाहर की हरकतें करना।
प्रयोग: उधर मियां ज़हूर के बेटे को देखिए; कद अभी निकला नहीं और पेट से पाँव निकालने लगे हैं, इत्यादि।
शब्दावली (ज़ख़ीरा-ए-अल्फ़ाज़):
नंबर 1: तजाहुल-ए-आरिफ़ाना (تَجَاہلِ عَارِفَانہ)
अर्थ: जान-बूझकर अनजान या नासमझ बनना।
प्रयोग: नफ़ीसी साहब बड़े जिगर वाले (साहसी) आदमी हैं और तजुर्बेकार हैं, मगर अपने बेटे की बात पर तजाहुल-ए-आरिफ़ाना से काम ले रहे हैं (जान-बूझकर अनजान बन रहे हैं)।
नंबर 2: रफ़ी-उल-मर्तबत (رَفِیعُ الْمَرتَبَت)
अर्थ: ऊँचे मर्तबे वाला, ऊँची शान वाला।
प्रयोग: अपने ज्ञान (इल्म), कर्म (अमल) और विनम्रता (आजज़ी) के कारण सूफी साहब एक रफ़ी-उल-मर्तबत (उच्च श्रेणी की) शख़्सियत हैं।