नंबर 1: सऊदी अरब सहित हर देश इजरायल के साथ अपने संबंधों पर प...
Ummah Post
13 January, 2024

नंबर 1: सऊदी अरब सहित हर देश इजरायल के साथ अपने संबंधों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर हो गया।

नंबर 2: इजरायल सैन्य शक्ति के मामले में चौथे नंबर पर था, अब उसका वह स्थान चला गया।

नंबर 3: अखबारों से पता चला कि कम से कम 300 सैनिकों को बंधक बना लिया गया, जिनमें कुछ मेजर और जनरल भी हैं, जबकि लगभग 200 नागरिकों को भी कैद किया गया जो सरकार में ऊंचे पदों पर हैं।

नंबर 4: चार सैन्य छावनियों (बसों) से ऐसे हथियारों का जखीरा समेटा गया जिन्हें कंधे पर उठाया जा सकता है।

नंबर 5: 150 से अधिक टैंकों को भस्म (नष्ट) कर दिया।

नंबर 6: मोसाद के विभिन्न ठिकानों को तबाह करके उनके लैपटॉप पर कब्जा कर लिया, जिनमें गाजा या मिडिल ईस्ट में इजरायली जासूसों के पते दर्ज हैं।

नंबर 7: सैनिकों और पुलिस के छोटे रडार और दर्जनों वायरलेस पर कब्जा जमा लिया जो गाजा से चालीस किलोमीटर के दायरे में एक्टिव थे।

नंबर 8: 15,000 रॉकेट दागे जिससे दुश्मन का भारी जानी और माली (धन-जन) नुकसान हुआ; अश्कलोन और उसके आस-पास से 5 लाख इजरायलियों को घर-बार छोड़कर शरणार्थी (रिफ्यूजी) बनने पर मजबूर कर दिया।

नंबर 9: 3,500 इजरायलियों को जहन्नुम वासिल किया (मौत के घाट उतार दिया)।

नंबर 10: दुनिया के सात बड़े देशों की इंटेलिजेंस को फेल करके अपने लक्ष्य को अंजाम दिया, जिससे उनकी नाक कट गई (अपमान हुआ)।

नंबर 11: फिलिस्तीन के मुद्दे को वैश्विक स्तर पर पूरी तरह से जीवित कर दिया।

नंबर 12: इजरायल के राजदूतों को कुछ देशों से भगा दिया गया।

नंबर 13: पश्चिमी देशों के आम नागरिकों की नजर में उनकी सरकारों को नंगा (बेनकाब) कर दिया।

नंबर 14: सऊदी अरब और अरब देशों में छिपे हुए पाखंडी (मुनाफिक) राजाओं और उनके चमचों के चेहरों से नकाब नोंच लिया।

नंबर 15: इस हमले के बाद इजरायल की अर्थव्यवस्था गिरती जा रही है।

नंबर 16: इजरायली प्रधानमंत्री को उसकी जनता की नजरों में दो कौड़ी का बना दिया।

नंबर 17: पूरे इस्लामी जगत के युवाओं में शहादत के प्रति प्यार पैदा कर दिया और किबला-ए-अव्वल (अल-अक्सा) पर मर-मिटने का जज्बा जगा दिया।

नंबर 18: उन सभी मुस्लिम सरकारों को नंगा कर दिया जो अमेरिका के पेशाब की धार देखकर अपना किबला तय करती हैं।

नंबर 19: मोहम्मद मुर्सी आदि की हत्या किसलिए करवाई गई थी, इस पर फिर से बहस छिड़ गई और लोग साफ-साफ कहने लगे कि उनकी हत्या से इस्लामी दुनिया का क्या नुकसान हुआ।

नंबर 20: सल्फी या सऊदी रियाल पर पलने वाले पाखंडी (मुनाफिक) उलेमाओं (धार्मिक गुरुओं) के चेहरे लोगों के सामने स्पष्ट हो गए।

नंबर 21: यहूदियों के खिलाफ ईसाइयों और अन्य लोगों के दिलों में नफरत का बीज बो दिया।

नंबर 22: फिलिस्तीनी जमीनों पर कब्जा करके जितने गांव बसाए गए हैं, अब एक भी इजरायली रात को चैन से नहीं सो सकता कि न जाने कब ये लोग किस सुराख से निकलकर हमें खत्म कर दें; यह डर मौजूदा हमले से पैदा हुआ है।

नंबर 23: कुछ बुजुर्ग बंधकों को रिहा करके दुनिया को बता दिया कि वे वो नहीं हैं जो पश्चिमी मीडिया उन्हें दिखाता है।

नंबर 24: दुनिया के विभिन्न देशों में सड़कों पर प्रदर्शनकारी निकल आए जो यहूदियों और उनके करीबियों से नफरत करते हैं।

नंबर 25: दुनिया के विभिन्न देशों की संसद (पार्लियामेंट) तक में उनकी आवाज में आवाज मिलाई जाने लगी।

नंबर 26: 'इजरायल को रक्षा (डिफेंस) का अधिकार है' की आड़ में अमेरिका बहादुर जो जुल्म करवाता रहा, रूस जैसे देश ने एक-एक पॉइंट स्पष्ट करके बताया कि इजरायल आक्रमणकारी (गासिब) है; इजरायल को नहीं बल्कि फिलिस्तीनियों को सेल्फ डिफेंस का अधिकार मिलना चाहिए।

नंबर 27: चीन का रुख भी इजरायल के खिलाफ स्पष्ट हो चुका है।

नंबर 29: शब-ए-मेराज (मिराज की रात) को हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने जिस स्थान पर नबियों की इमामत की थी, उस स्थान की किसके दिल में कितनी अहमियत, तड़प और मोहब्बत है, सब पर जाहिर कर दिया।

ये वे बड़े-बड़े फायदे नजर आ रहे हैं जिन्हें मैंने शामिल किया है, जबकि छोटे-मोटे फायदों का जिक्र ही क्या करना!

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