*✍🏻 ज़िंदगी के हर गुज़रते दिन में अगर आपको एक लम्हा भी ख़ुशी का मयस्सर (प्राप्त) हो, तो उसी लम्हे का शुक्रिया अदा किया करें; अपनी ज़ुबान और दिल को अल्लाह की नाशुक्रगुज़ारी से बचाएं।"*
नाज़िम नदवतुल उलमा हज़रत मौलाना बिलाल अब्दुल हई साहब हसनी नदवी ज़ीद मजदुहू ने दारुल उलूम के साबिक़ मोहतमिम हज़रत उस्ताज़ डॉक्टर मौलाना सईदुर्रहमान साहब आज़मी नदवी रह. के हवाले से यह सराहत फ़रमाई कि सख़्त जिस्मानी ज़ोअफ़ के सबब हज़रत मोहतमिम साहब पिछले ढाई साल से दारुल उलूम आने से क़ासिर रहे, इस दौरा...