लोगों के साथ ऐसे पेश आओ जैसे कोई किताब पढ़ रहे हो…!!

मुना...
Ummah Post
19 November, 2024

लोगों के साथ ऐसे पेश आओ जैसे कोई किताब पढ़ रहे हो…!!

मुनाफ़िक़ (पाखंडी) को नज़रअंदाज़ कर दो,

बुरे (पन्ने) को फाड़ दो…

और सबसे ख़ूबसूरत पर रुक जाओ।

इंसान भी किताबों की तरह होते हैं,

कुछ लोग सिर्फ़ कवर (मुखपृष्ठ) से धोखा देते हैं,

जबकि कुछ की आंतरिक सामग्री (अंदरूनी मवाद) हैरान करने वाली होती है

भले ही उनका कवर बिल्कुल साधारण सा लगता हो।

पहली नज़र में प्रभावित न हो,

वक़्त हर चीज़ का फ़ैसला कर देता है…!!

ज़िंदगी की किताब को ग़ौर से पढ़ो,

हर पन्ना एक नया सबक़ (पाठ) सिखाता है…

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नबी करीम ﷺ विभिन्न सामाजिक रूपों में (पति, पिता, भाई, नाना, बेटा, ससुर और भतीजे के रूप में)
लेख

नबी करीम ﷺ विभिन्न सामाजिक रूपों में (पति, पिता, भाई, नाना, बेटा, ससुर और भतीजे के रूप में)

नबी करीम ﷺ पति के रूप में (बतौर शौहर): नबी करीम ﷺ अपने परिवार के साथ बहुत ही मोहब्बत से पेश आते थे। आपने इर्शाद फ़रमाया: "मैं तुममें से अपने परिवार के लिए सबसे बेहतर हूँ।" एक मर्तबा आप अपने घर तशरीफ़ लाए, उस वक़्त सैयदा आयशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) प्याले में पानी पी रही थीं... आपने दूर से फ़रमाया, "हु...