*ख्वाहिशों के बाज़ार में धूप थी खुदग़र्ज़ी की,*
*आदमी थे बर...
Ummah Post
18 November, 2024

*ख्वाहिशों के बाज़ार में धूप थी खुदग़र्ज़ी की,*

*आदमी थे बर्फ़ के............... सब के सब पिघल गए।*

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चालाक अमीर और समझदार किसान की कहानी
लेख

चालाक अमीर और समझदार किसान की कहानी

एक शातिर और चालाक मालदार (अमीर) शख़्स किसी गाँव में एक किसान के पास पहुँचा और उसे पार्टनरशिप (साझेदारी) का ऑफ़र दिया, कि रक़म मेरी होगी और मेहनत तुम्हारी! लेकिन जब फ़सल तैयार हो जाएगी तो जो हिस्सा ज़मीन के अंदर होता है वह तुम्हारा जबकि ऊपर वाला सारा मेरा होगा (यह चालाकी उसने इसलिए की क्योंकि ज़मीन म...