गाने = गुनाह हैं
गाने = ग़म बढ़ाते हैं
गाने = तंगी बढ़ाते...
Ummah Post
17 November, 2024

गाने = गुनाह हैं

गाने = ग़म बढ़ाते हैं

गाने = तंगी बढ़ाते हैं

गाने = बहुत परेशान करने वाले हैं

गाने = क़ुरआन सुनने से नफ़रत पैदा करते हैं

गाने = क़ुरआन को दिल पर भारी बनाते हैं

गाने = इबादात को मुश्किल बनाते हैं

गाने = बुरे लगते हैं

गाने = दिल को दुखी करते हैं

गाने = दिल को मुर्दा करते हैं

गाने = अफ़सुर्दगी (उदासी) पैदा करते हैं

*"लेकिन क़ुरआन इन सब के बरअक्स (विपरीत) है, यह दिल को सुकून देता है, दिल को आराम पहुंचाता है और दिल की तकलीफ़ दूर करता है।"*

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