फह्याशी (अश्लीलता) का रियाद सीज़न

सऊदी हुक्मरान जिस तरह उ...
Ummah Post
17 November, 2024

फह्याशी (अश्लीलता) का रियाद सीज़न

सऊदी हुक्मरान जिस तरह उरियानियत (नग्नता) व फह्याशी को फ़रोग़ (बढ़ावा) दे रहे हैं वह बहुत तशवीशनाक (चिंताजनक) व ख़तरनाक है।

वहां के उलेमा मजबूर और हुकूमत के इशारों पर चलने के लिए माज़ूर (लाचार) हैं, जिन्हें जुर्रत-ए-इज़हार (बोलने की हिम्मत) मिली वो मक़हूर (उत्पीड़ित) हैं, हमारे यहां अब भी ऐसे-ऐसे वफ़ादार सिपाही हैं जो पानी पी-पी के (बढ़-चढ़कर) डिफ़ा-ए-हाकिम (शासक के बचाव) का फ़रीज़ा अंजाम देते हैं। क़ुरआन ऐसे मुजरिमों को दुनिया व आख़िरत में सज़ा का हुक्म देता है।

إِنَّ الَّذِينَ يُحِبُّونَ أَن تَشِيعَ الْفَاحِشَةُ فِي الَّذِينَ آمَنُوا لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ ۚ وَاللَّهُ يَعْلَمُ وَأَنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ (حج 19) (हज्ज: 19)

[बेशक जो लोग यह पसंद करते हैं कि ईमान वालों में अश्लीलता फैले, उनके लिए दुनिया और आख़िरत में दर्दनाक अज़ाब है। और अल्लाह जानता है और तुम नहीं जानते।]

अगर कोई हुकूमत इस्लामी है तो उसका फ़र्ज़ है कि फह्याशी को रोके, फ़हश फैलाने वाले ज़राए (साधनों) का सद्द-ए-बाब (रोकथाम) करे, क़ानूनी इक़दामात (कदम) करे, उसके हुक्काम व क़ाज़ी सब मुतहर्क (सक्रिय) हों और ऐसे मुजरिमों को सज़ा दें जिन्हें क़ुरआन आवाम का मुजरिम क़रार दे रहा है और हुक्म बयान कर रहा है कि उन्हें दुनिया व आख़िरत में सज़ा मिलनी चाहिए।

सवाल यह है कि कोई हुकूमत अगर ख़ुद ही इन जरायम (अपराधों) की मुर्तकिब (दोषी) हो, अपने चेहरे पर इस्लामियत व किताब व सुन्नत का ग़िलाफ़ चढ़ा ले, अपने आप को ख़िदमत-ए-हरमैन के पर्दे में लपेट कर फह्याशी के सीज़न मुनअक़िद (आयोजित) करे, हरमैन के तक़द्दुस (पवित्रता) को पामाल करे, मक्का व मदीना की अज़मत (महानता) को चैलेंज करे तो फिर ऐसी हुकूमत पर क्या हुक्म है, क्या उसके ख़िलाफ़ राय-ए-आमा (जनमत) न बनाई जाए, क्या पब्लिक में उसके जरायम न बयान किए जाएं, क्या उस पर नक़्द (आलोचना) न किया जाए। वो कैसे ढीठ लोग जो खुली आंखों ऐसी फ़हश तब्दीली देख कर भी वफ़ादारी की वकालत करते हैं और ज़बान बंद रख के इन तब्दीलियों की ख़तरनाकी ज़ाहिर होने का इंतज़ार करने को कहते हैं और जाने कैसे-कैसे वाही-तबाही (बेतुके) मश्वरे देते हैं और पूरी ढिठाई के साथ डिफ़ा (बचाव) में झूठ लिखते और बोलते हैं...... अल्लाह फ़हश फैलाने वालों और उनका बेजा डिफ़ा करने वालों से उम्मत की हिफ़ाज़त फ़रमाए।

त. अय्यूबी

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