:) क्या सादा ज़माना था कि एक ब्रैकेट और दो बिंदु : ) लगाकर म...
Ummah Post
14 November, 2024

:) क्या सादा ज़माना था कि एक ब्रैकेट और दो बिंदु : ) लगाकर मुस्कुरा लेते थे,

अब तो इमोजीस ने ऐसी मुसीबत डाल दी है कि मुस्कुराना भी पंद्रह किस्म का हो गया है।

🤓😄😁😆😂😅🤣🙃🙂☺️😊😍🤩🥰🙃

और हालात की सितम-ज़रीफ़ी (विडंबना) देखें कि शर्माने का इज़हार करने के लिए सिर्फ

🙈🙈🙈 "बंदर" उपलब्ध है। 😂

*🤓🤓 अनोखी मुस्कुराहट 🤓🤓*

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आख़िरत की छतरी
लेख

आख़िरत की छतरी

एक दफ़ा क्रिकेट मैच के दौरान जब अचानक बारिश शुरू हुई तो स्टेडियम में मौजूद हर शख़्स ने अपनी छतरी खोलकर सर पर रख ली थी। जब उस वक़्त कैमरा तमाशाइयों (दर्शकों) के स्टैंड पर गया तो रंग-बिरंगी छतरियों का एक हसीन मंज़र तैयार हो चुका था, शायद ही कोई ऐसा शख़्स हो जिसने छतरी न ली हो या बारिश की बरसाती (रेनको...