"इज़्ज़त की एक बूंद शोहरत के समंदर से बेहतर है, क्योंकि मशहू...
Ummah Post
13 November, 2024

"इज़्ज़त की एक बूंद शोहरत के समंदर से बेहतर है, क्योंकि मशहूर तो इब्लीस (शैतान) भी था, लेकिन इज़्ज़त 'हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम)' की थी।"

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हज़रत हकीम-उल-इस्लाम क़ारी मोहम्मद तय्यब साहब रहमतुल्लाह अलैह, "नाश्तह" (नाश्ता) और एक बंगाली छात्र
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हज़रत हकीम-उल-इस्लाम क़ारी मोहम्मद तय्यब साहब रहमतुल्लाह अलैह, "नाश्तह" (नाश्ता) और एक बंगाली छात्र

डॉ. ताबिश मेहदी अपनी आत्मकथा में लिखते हैं, हमारे बुज़ुर्ग दोस्त स्वर्गीय मुफ्ती अब्दुल रऊफ मुंसिफ मुबारकपुरी ने अपने छात्र जीवन की एक घटना एक से अधिक बार सुनाई थी। उन्होंने बताया था कि चूंकि दारुल उलूम देवबंद में नाश्ते की व्यवस्था कभी नहीं रही है, इसलिए जो छात्र नाश्ता करना चाहते हैं, वे अपने-अपने...