"रहमत (कृपा) को ज़हमत (आफ़त), मोहब्बत को मुसीबत, इज़्ज़त को...
Ummah Post
12 November, 2024

"रहमत (कृपा) को ज़हमत (आफ़त), मोहब्बत को मुसीबत, इज़्ज़त को तोहमत (कलंक), हीरे को पत्थर और पत्थर को सितारा बनते देर नहीं लगती।" ✨⏳

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अल्लामा इकबाल का हुज़ूर ﷺ से गहरा प्रेम और आज्ञापालन
लेख

अल्लामा इकबाल का हुज़ूर ﷺ से गहरा प्रेम और आज्ञापालन

शायर-ए-मशरिक़ (पूर्व के कवि) अल्लामा मोहम्मद इकबाल ने सुन्नत-ए-रसूल (पैगंबर की परंपरा) के पालन को अपना शियोवा-ए-हयात (जीवन का तरीका) बना लिया था। "जौहर-ए-इक़बाल" में एक अजीब और बसीरत अफ़रोज़ (ज्ञानवर्धक) घटना का वर्णन किया गया है, जिससे अल्लामा इकबाल के जज़्बा-ए-शौक़ और इतात-ए-रसूल (रसूल के प्रति प्...