मौजूदा तहरीकों (आंदोलनों) के सिलसिले में हज़रत (मौलाना अशरफ अली थानवी) ने फ़रमाया: "अगर तुम मज़ालिम (अत्याचारों) से बचने पर क़ादिर (सक्षम) नहीं हो, तो अपने आप को 'मक्की' (मक्का के दौर का) समझो और सब्र करो। और अगर क़ादिर हो, तो 'मदनी' (मदीना के दौर का) समझो और कुदरत (शक्ति) से काम लो। मगर अब तो यह हो रहा है कि या तो मक्की की जगह 'मक्खी' और ज़लील (अपमानित) बनेंगे, और या मदनी की जगह 'बदनी' (शारीरिक/पहलवान) बनेंगे और ख़तरात (खतरों) में फँसेंगे..."
Ummah Post