"हम अपनी पूरी ज़िंदगी पैसों के पीछे भागते रहते हैं और उस महान मक़सद को भूल जाते हैं जिसके लिए हमें पैदा किया गया था। और जब हम पैसे तक पहुँचते हैं, तो ज़िंदगी ही ख़त्म हो जाती है। 👌🏻💔💸"
मलफ़ूज़ात : हज़रत मौलाना मोहम्मद हकीम अख्तर साहब रहमतुल्लाह अलैह -
व्यापारिक (کاروباری) लाइन में भी मर्द और औरत का इख़्तिलात (मेल-जोल) उरूज (चरम) पर है, देखिए! अव्वल (पहले) तो ऐसी रोज़ी तलाश करे जिसमें गुनाह का अंदेशा न हो, औरतों से साबक़ा (सामना) न हो, चाहे रोज़ी कम हो, पत्थर बांधकर भी अगर ख़ुद...