"ऐ मेरे मौला! अगर तूने मुझे अज़ाब (दंड) देने का फ़ैसला कर ही...
Ummah Post
11 November, 2024

"ऐ मेरे मौला! अगर तूने मुझे अज़ाब (दंड) देने का फ़ैसला कर ही लिया है, तो मेरे मामले को लोगों से छुपा कर रखना, ताकि कोई शख़्स यह न कहता फिरे: 'आज वह भी अज़ाब में मुब्तला (घिरा) है जो ख़ुदा तक रास्ता दिखाया करता था।'"

(इमाम इब्न अल-जौज़ी, सैद अल-ख़ातिर: 305)

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एक बोर्ड और दो वाक्य:
लेख

एक बोर्ड और दो वाक्य:

एक अंधा आदमी एक इमारत के पास बैठा था और पास में एक बोर्ड रखा था जिस पर लिखा था, "मैं अंधा हूँ, कृपया मेरी मदद करें।" साथ में उसकी टोपी पड़ी हुई थी जिसमें कुछ सिक्के थे। एक आदमी वहाँ से गुज़र रहा था। उसने अपनी जेब से कुछ सिक्के निकाले और टोपी में डाल दिए। अचानक उसकी नज़र बोर्ड पर पड़ी। उसने बोर्ड...