"आज की जनरेशन (पीढ़ी) बेहद नाशुक्रगुज़ार है; माँ-बाप रोज़ाना...
Ummah Post
11 November, 2024

"आज की जनरेशन (पीढ़ी) बेहद नाशुक्रगुज़ार है; माँ-बाप रोज़ाना 50 या 100 रुपये भी दे दें, तब भी कहते हैं कि बहुत कम हैं! 🥺😭😬

और एक हम थे बेचारे, जो पूरे रास्ते ज़मीन पर नज़रें टिका कर चलते थे कि कहीं से बस एक रुपया ही मिल जाए तो हमारी तो पार्टी हो जाएगी! 😝🙈🙊🤣🤣🤣😂"

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दुनिया की हक़ीक़त और आख़िरी सफ़र की तैयारी
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दुनिया की हक़ीक़त और आख़िरी सफ़र की तैयारी

रसूलुल्लाह ﷺ फ़रमाया करते थे: "मेरा दुनिया से क्या तअल्लुक़ (संबंध)? मेरी दुनिया की मिसाल तो ऐसी ही है कि जैसे कोई सवार किसी दरख़्त (पेड़) के साए में (दम लेने के लिए) ठहर जाए, फिर उसे छोड़ कर चला जाए।" हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने अपने साथियों को वसीयत फ़रमाई: "(दुनिया से) गुज़र जाओ, इसे आबाद करने में न लग...