"विरोध और पाखंड (मुनाफ़िक़त)"

विरोध डटकर करें लेकिन पाखंड (...
Ummah Post
7 November, 2024

"विरोध और पाखंड (मुनाफ़िक़त)"

विरोध डटकर करें लेकिन पाखंड (मुनाफ़िक़त) कभी न करें, क्योंकि विरोध साहसी, बहादुर और संस्कारी (खानदानी) लोग करते हैं जबकि पाखंड बुज़दिलों और नीच लोगों की विशेषता है।

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'रहमान' और 'रहीम' नाम के उपयोग के शरई अहकाम
लेख

'रहमान' और 'रहीम' नाम के उपयोग के शरई अहकाम

"रहमान" शब्द का प्रयोग अल्लाह तआला के अलावा किसी और के लिए करना जायज़ नहीं है, बल्कि हराम है। अगर कोई व्यक्ति किसी इंसान को "रहमान" कहे तो यह शिर्क है, क्योंकि अल्लाह तबारक व तआला के अलावा कोई भी ऐसा नहीं हो सकता जिसकी रहमत (दया) इतनी विशाल हो। इसलिए किसी और को रहमान या अर-रहमान कहना जायज़ नहीं है।...