दोनों अमरूद एक ही पेड़ की एक ही शाखा पर लटके हुए हैं। इनमें से एक पहले ही पक चुका है, जबकि दूसरे को पकने के लिए और समय चाहिए; कुदरत इन अमरूदों के ज़रिए हमें एक अहम सबक़ देती है।
जब हम अपने आस-पास दूसरों को कामयाब होते देखते हैं, जबकि हम अभी कामयाब नहीं हुए हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि हम नाकाम हैं। यह सिर्फ इस बात की निशानी है कि हमारा वक्त अभी नहीं आया है।
इसलिए, हमें सब्र करना चाहिए, इंतज़ार करना चाहिए, और मायूस नहीं होना चाहिए। शायद हम भी अपने पकने के मुक़ाम से सिर्फ कुछ ही दिन दूर हों।
याद रखें, हमारा वक्त भी आएगा, लेकिन इसके लिए सब्र और मेहनत की ज़रूरत है...
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♦️♦️ *उर्दू अदब* ♦️♦️