हज़रत मुजद्दिद अल्फ़ थानी (रहमतुल्लाह अलैह) के एक ख़लीफ़ा (श...
Ummah Post
23 November, 2021

हज़रत मुजद्दिद अल्फ़ थानी (रहमतुल्लाह अलैह) के एक ख़लीफ़ा (शिष्य) ने आपको ख़त लिखते हुए अपने इस्लाही (सुधारात्मक) और मिल्ली (राष्ट्रीय) कारनामे शुमार कराए कि: "आजकल मैं वाज़ (उपदेश) भी कह रहा हूँ, दर्स व तदरीस (शिक्षण) भी कर रहा हूँ, और तस्नीफ़ व तालीफ़ (लेखन और संकलन) भी जारी है... वग़ैरह-वग़ैरह।"

हज़रत ने जवाब में एक अजीब (असाधारण) बात फ़रमाई, जो हम सब के लिए बेहद ग़ौरतलब (ध्यान देने योग्य) है। फ़रमाया कि:

"मियाँ! यह सब तो तुम दूसरों का काम कर रहे हो? और इस तरह की ख़िदमात (सेवाएँ) तो अल्लाह तआला किसी फ़ाजिर शख़्स ('रजुल-ए-फ़ाजिर' - पापी पुरुष) से भी ले लेते हैं।

तुम तो यह बताओ कि तुम्हारे ज़ाती (व्यक्तिगत) अमाल (कर्म) और अहवाल (आध्यात्मिक स्थितियाँ) कैसे चल रहे हैं? तज़्किया-ए-क़ल्ब (दिल की पाकीज़गी) और इस्लाह-ए-नफ़्स (आत्म-सुधार) का मामला कैसा है?"

हज़रत के इस मफ़हूम (विषय) को सामने रखते हुए अगर आज हम अपने हालात का जायज़ा लेते हैं, तो मामला बेहद नाज़ुक नज़र आता है।

क्योंकि जिस इल्म (ज्ञान) का मक़सद और महवर (केंद्र) अपनी फ़िक्र और इस्लाह के बजाय, सिर्फ़ दूसरों पर नज़र रखना हो जाए, तो उसका मामला ख़तरनाक हो जाता है।

Share this article
काष हम भी ऐसे मुसलमान बन जाएं
लेख

काष हम भी ऐसे मुसलमान बन जाएं

अल्जीरिया से ताल्लुक रखने वाली नामी और अरब दुनिया की सबसे मक़बूल (लोकप्रिय) एंकर और पत्रकार ख़दीजा बिन्त क़ुन्हा अपने दौरा-ए-अमेरिका (अमेरिका यात्रा) के बारे में बताती हैं कि वह एक सुपरस्टोर में शॉपिंग के बाद काउंटर पर भुगतान (पेमेंट) के लिए अपनी बारी का इंतज़ार कर रही थीं कि इसी दौरान एक बाहिजाब (ह...