अपने आप से दोस्ती निभाएं। 

अगर आप खुद अंदरूनी कशमकश (आंतर...
Ummah Post
6 November, 2024

अपने आप से दोस्ती निभाएं।

अगर आप खुद अंदरूनी कशमकश (आंतरिक संघर्ष) के शिकार हैं, तो आपकी ज़िंदगी बाहर से कैसे सामंजस्यपूर्ण (हम-आहंग) होगी?

दूसरों के साथ हमारे टकराव असल में उन्हीं हंगामों का अक्स (प्रतिबिंब) हैं जो हमारे अंदर पनप रहे होते हैं।

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उलेमा (विद्वान) ही औलिया (अल्लाह के मित्र) हैं
लेख

उलेमा (विद्वान) ही औलिया (अल्लाह के मित्र) हैं

यह्या बिन यह्या बयान करते हैं: जब इमाम मालिक (रहमतुल्लाह अलैह) की मृत्यु-शय्या की बीमारी लंबी हो गई और अंतिम समय करीब आ गया, तो मदीना मुनव्वरा और अन्य शहरों से सभी उलेमा (विद्वान) और फुकहा (न्यायविद) इमाम साहब के घर पर जमा हो गए ताकि वे समय के इमाम से आखिरी मुलाकात का लाभ उठा सकें और उनकी वसीयतों (उ...