अपने आप से दोस्ती निभाएं।
अगर आप खुद अंदरूनी कशमकश (आंतरिक संघर्ष) के शिकार हैं, तो आपकी ज़िंदगी बाहर से कैसे सामंजस्यपूर्ण (हम-आहंग) होगी?
दूसरों के साथ हमारे टकराव असल में उन्हीं हंगामों का अक्स (प्रतिबिंब) हैं जो हमारे अंदर पनप रहे होते हैं।
अपने आप से दोस्ती निभाएं।
अगर आप खुद अंदरूनी कशमकश (आंतरिक संघर्ष) के शिकार हैं, तो आपकी ज़िंदगी बाहर से कैसे सामंजस्यपूर्ण (हम-आहंग) होगी?
दूसरों के साथ हमारे टकराव असल में उन्हीं हंगामों का अक्स (प्रतिबिंब) हैं जो हमारे अंदर पनप रहे होते हैं।