कुछ राहों पर आपको तन्हा (अकेले) ही चलना पड़ता है, वहाँ न तो...
Ummah Post
5 November, 2024

कुछ राहों पर आपको तन्हा (अकेले) ही चलना पड़ता है, वहाँ न तो दोस्त आपका साथ दे सकते हैं, न ही अहल-ए-खाना (परिवार वाले), यहाँ तक कि शरीक-ए-हयात (जीवनसाथी) भी नहीं। वहाँ आप और सिर्फ आप होते हैं।

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हे ईश्वर! मेरा नूर मुझे लौटा दे!!
लेख

हे ईश्वर! मेरा नूर मुझे लौटा दे!!

(नोट: इस घोषणापत्र के संबोधित व्यक्ति केवल शरिया विज्ञान (उलूम-ए-शरीयत) के छात्र हैं।) आरिफ़ों (अल्लाह की पहचान रखने वालों) ने शरिया के ज्ञान को इस तरह परिभाषित किया है कि यह अल्लाह का नूर (प्रकाश) है जो बंदे के सीने में रोशन हो जाता है। यह नूर दिल में चिराग की लौ की तरह पूरी तरह महसूस होता है। ब...