तुम्हें है नाज़ लश्कर (सेना) पर, तुम्हें बारूद की नुसरत (सहा...
Ummah Post
2 November, 2024

तुम्हें है नाज़ लश्कर (सेना) पर, तुम्हें बारूद की नुसरत (सहायता),

हमारे साथ है अल्लाह, उसी से अपनी यारी है।

अभी आग़ाज़ (शुरुआत) है आबी, इसे अंजाम (अंत) क्या लिखना!

अभी डॉलर नहीं जीता, अभी तक ख़ून भारी है।

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खाना किसने भेजा?
लेख

खाना किसने भेजा?

इमाम क़ुर्तुबी (रह.) फ़रमाते हैं कि क़बीला-ए-अशअरीयीन के लोग जब हिजरत करके मदीना मुनव्वरा पहुँचे, तो उनका खाने-पीने का तमाम सामान ख़त्म हो चुका था। चुनाँचे उन्होंने अपना एक आदमी रसूलुल्लाह ﷺ की ख़िदमत में भेजा कि हमारे खाने-पीने का कोई इंतज़ाम किया जाए। वह आदमी जब रसूलुल्लाह ﷺ के घर के दरवाज़े पर पह...