जलालुद्दीन सुयूती अपने अकीदतमंदों (अनुयायियों) को नसीहतें दे रहे थे कि सात बातें ऐसी हैं जो किसी भी इंसान को ज़लील (अपमानित) कर सकती हैं:
(१) किसी दावत में बिना बुलाए पहुँच जाना।
(२) किसी मजलिस (सभा) में अपने मर्तबे और हैसियत से ऊँची जगह पर बैठना।
(३) मेहमान बनकर मेज़बान (मेज़बान पर हुक्म चलाना) पर रौब झाड़ना।
(४) दूसरों की बातों में दखल देना।
(५) उन लोगों को संबोधित करना जो सुनने के लिए तैयार न हों।
(६) बदचलन (बुरे चरित्र वाले) से दोस्ती करना।
(७) पत्थरदिल (संगदिल) और लालची दौलतमंद से मदद की उम्मीद रखना या मदद माँगना।