खामोशी अख्तियार कर लें मगर गिला मत करें। गोशा-नशीं (एकांत मे...
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खामोशी अख्तियार कर लें मगर गिला मत करें। गोशा-नशीं (एकांत में) हो जाएं मगर अपना मियार (स्तर) मत गिराएं। इज्जत न मिले तो किनाराकशी (दूरी) कर लें। वक्त की भीख न मांगें; इज्जत और मोहब्बत के बगैर किसी रिश्ते का वजूद नहीं। इज्जत वह नहीं जो बातों से सुनाई जाती है; इज्जत वह है जो अमल (व्यवहार) में दिखाई देती है।

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सीरत-उन-नबी ﷺ पर उपयोगी पुस्तकें
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सीरत-उन-नबी ﷺ पर उपयोगी पुस्तकें

हज़ूर-ए-अकरम ﷺ की सीरत-ए-मुबारका पर अरबी भाषा में निम्नलिखित पुस्तकों से लाभ उठाया जा सकता है: 1: अस-सीरत अन-नबविय्याह: दो खंडों (जिल्दों) में चार भागों पर आधारित यह अब्दुल मलिक बिन हिशाम अल-हिमयरी (मृत्यु: 833 हिजरी) की है, जो इब्न इसहाक़ की 'अल-मग़ाज़ी व अस-सियर' के क्रम (तरतीब) से लिखी गई है।...