कुछ क़र्ज़ ऐसे होते हैं जो चाह कर भी अदा नहीं किए जा सकते, ज़िंदगी की किताब में सबसे हसीन सफ़हा (पन्ना) माँ-बाप की मोहब्बत है...!!❤️
رب ارحمھما کما ربیانی صغیرا
"ऐ मेरे रब! उन दोनों (माता-पिता) पर रहम फ़रमा, जैसा कि उन्होंने बचपन में मुझे पाला।"
कुछ क़र्ज़ ऐसे होते हैं जो चाह कर भी अदा नहीं किए जा सकते, ज़िंदगी की किताब में सबसे हसीन सफ़हा (पन्ना) माँ-बाप की मोहब्बत है...!!❤️
رب ارحمھما کما ربیانی صغیرا
"ऐ मेरे रब! उन दोनों (माता-पिता) पर रहम फ़रमा, जैसा कि उन्होंने बचपन में मुझे पाला।"